Friday, 19 July 2013
!! मेरी बेबसी !!
मेरे फैसलों से हैरान रह जाते है सब !
अक्सर गम खरीद कर प्यार निभाता हू !
इसलिए शायद "विजय"को ठुकराते है सब !
करते है लोग "विजय"से बेवफाई
और मेरे बहते हुए अश्को से अपने
दिल की प्यास बुझाते है सब !
छोड़ देते है अक्सर लोग सुन-सान
राहों में "विजय" का साथ !
और दूर से ही "विजय" की बेबसी पर
मुस्कुराते है सब !
VIJAY GIRI
Wednesday, 26 June 2013
!! प्राक्रतिक संदेह !!
खो रही नमी ये भूमि
सूरज की तपीश अभी बाकी है !
सिमट रही ये नदिया ,अब तो वारीश
की भी कमी खलने वाली है !
संभल जाये हम मानव
ये वृछ ही जिंदगी हमारी है !
मत करो खिलवाड़ इस प्राक्रतिक से
जाने कैसी -कैसी विपदा आने वाली है !
आगाह कर रही ये प्राक्रतिक हमें
कही सुखा तो कही पनी-पानी है !
खो रही प्रक्रति अपना संतुलन
कही भूकंप तो कही तबाही है !
अब तो संभल जाये हम
इसी वृछ इसी नदियों से प्रक्रति
और प्रक्रति से ही जिंदगी हमारी है !
विजय गिरी
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