Thursday, 17 July 2014

 

मेरे सीने में बड़ी पीड़ा होती है
जब कोख में कोई नन्ही परी
दफ़न होती है !!

मेरे दिल में एक कशक सी होती है
जब दहेज़ के नाम पर
कोई जननी दफ़न होती होती है !!

मेरी कलम स्याही नहीं
पीड़ा के अश्क उगलती है
ज़ख्मो पर मलहम बनने वाली
 नारी जब प्यार लिखते-लिखते भी
दफ़न होती है !!

विजय गिरी

मैं नये पथ पर चलने वाला
 मुशाफिर थोडा पुराना हु !!

 सवार हुआ जब से मैं 
 मोहबत ऐ ज़माने कि 
कस्ती में यारो !!

कशम उस खुदा कि
 हर लहर ऐ कातिल नज़रो का
 सीर्फ मै ही निशाना हु !!

 विजय गिरी

दिल से दिल मिला के गोरी
 चल तू भी मेरी रहो पर
 तुम्हे जन्नत की शेर कराउंगा
 बाहों में भर कर अपनी
 गोरी जन्मो-जन्मो के लिए
 तेरा में हो जाऊंगा !!

थाम ले गोरी अब तू भी दिल मेरा
 वार्ना तू पछताएगी
 नहीं मिलेगा कोई दीवाना
 मुझ जैसा
 तुम्हे याद मेरी बहुत आएगी!!

दिल दुखायेगे तुम्हार ये दुनिया वाले
 मेरी ये सांसे जब तुमसे रुठ जाएगी
दिल से दिल मिला के गोरी
 चल तू भी मेरी रहो पर
 पा कर तेरा प्यार रांझा में बन जाउंगा
 साथ तेरा पा कर गोरी
 जन्मो-जन्मो के लिए तेरा में हो जाऊंगा !!


अब इस दिल में कोई ख़्वाब ना रहा
 ऐ खुदा मुझे अब तुझ पर
 ऐतवार ना रहा !!

जिसने माना प्यार को खुदा
 वो खुदा की चाहत में
 इन्सान ना रहा !!

इस बेदर्द दुनिया में शायद
 अब तू पत्थर के मंदिर में
 भगवान ना रहा !!

 विजय गिरी
 
मुझसे भी कर थोड़ी वफ़ा तू
लबो को करीब आने दे
एक हल्का सा नशा
मेरे दिल पर भी
तू अब चढ़ जाने दे !!

बहुत सुने है
प्यार-मोहबत के किस्से मैने
ये खूबसूरत गुनाह
एक बार हो जाने दे !!

ना कशक रहे तेरे दिल में
ना कशक रहे मेरे दिल में

दिल से दिल मिल जाने दे
मुझसे भी कर थोड़ी वफ़ा तू
लबो को करीब आने दे !!

चढ़ता है अगर खुमार मोहबत का
तो प्यार में ये खूबसूरत
गुनाह हो जाने दे !!

विजय गिरी



ज़िन्दगी है थमी-थमी सी
पलकों में नमी है !!
बैठे है तेरे यादो के साये तले
बस तेरी ही कमी है !!

बेपनाह मोहबत दिल में
आँखों में नींद बड़ी है
जो ना मीलो तुम तो
सो जाऊ ता-उम्र के लिए
दिल को तेरी ही कमी है !!

ज़िन्दगी है अधूरी सी
ओठो को प्यास बड़ी है
खो गई है तू ज़िंदगी मेरी
बस तेरी ही कमी है !!
विजय गिरी

कच्चे धागो पर भी कभी-कभार
 रंग गहरे चढ़ जाते है !!

 इस कश्म-कस कि ज़िंदगी में
 कुछ रिस्तो के डोर हाथो से
 छूट जाते है ! !

बढ़ जाते है फासले दो दिलो के बीच
 वक्त-वे-वक्त वो अहसासो के गहरे रंग ही
 दस्तक पलकों पर दे जाते है !!

 विजय गिरी