Sunday, 12 January 2014



इश्क़
 कमब्खत ये इश्क भी क्या चीज है 
ख़वाबों में आकर 
दीवानो को तड़पती है ये इश्क !

सामने आने पर 
जाने क्यों शर्माती 
और नज़रे चुराती है ये इश्क !

माना कि ख़ुदा ने 
बड़ी ही फुर्सत से नवाजा है 
इस इश्क को !

 दीवानों ने भी तो 
अपने ईमान अपनी शिदद्त से
 चाहा है इस इश्क को !

 फिर भी जानें क्यों 
दीवानो को बार-बार 
आजमाती है ये इश्क !


भारत माता के लाल तुम्ही हो 
भरस्टाचार के खिलाफ उठने वाले 
वो इन्कलाब तुम्ही हो 

ऐ मेरे आज़ाद देश के गुलाम सिपाहियो 

ये चीन-पाकिस्तान के छल से
 तुम विचलित ना हो 

अगर खोल दिए जाये हाथ तुम्हारे 
 तो दुश्मनो का सर कलम करने वाले 
वो समसिर तुम्ही हो !

Monday, 25 November 2013


                                                                   


केसे करे हम प्यार तुम्हे
ये हमें तुम बता दो !

थाम लो अब तुम
हमारे नाजुक से दिल को
या हमारी खता बता दो !

तड़प रहे है हम
तुम्हारे वीरह कि अग्नि में
अब थोडा तुम ये दूरियाँ मिटा दो 

केसे करे हम प्यार तुम्हे
ये हमें अब तुम ही बता दो 
VIJAY GIRI

Tuesday, 5 November 2013

 
मेरा चाँद 
मेरा चाँद मेरे दिल में रहता है 
मेरे चाँद के लिए तो हर दिन
मेरा करवा-चोथ रहता है !

मांग भरी जिस चाँद ने मेरी
उसकी शीतल सी छाव 
मेरे बगिया में रहती है !

खिलते है फुल खुशियों के
जिसके प्यार से !
वो चाँद मेरे दिल में रहता है 

मेरे चाँद के लिए तो हर दिन 
मेरा करवा-चोथ रहता है !
 
विजय गिरी 

Thursday, 10 October 2013



अब इस ज़माने में कहा किसी का
कोई साथ निभाता है !
अँधेरी राहों में तो अपना साया
भी साथ छोड़ जाता है !

कहते है हम जिसे अपनी ज़िन्दगी
एक दिन वो ज़िन्दगी ही
हमें धोखा दे जाता है


विजय गिरी



Friday, 4 October 2013






तलाश 
इस  एक  बेगाने से शहर में !
मै अपना एक मुकम्मल
मुकाम ढूंड रहा हु !

दिए है जिस बेवफा ने
मेरे दिल पर-ता-उम्र  के लिए ज़ख़्म !
उस बेवफा के कदमो के
 निशान ढूंड रहा हु !

इस एक बेगाने से शहर में !
मै एक अपना मुकम्मल
कब्रिस्तान ढूंड रहा हु !
विजय गिरी
 
 

इस एक बेगाने से शहर में !
मै एक अपना मुकम्मल
कब्रिस्तान ढूंड रहा हु !
विजय गिरी

Wednesday, 2 October 2013


 ऐ दोस्तों अपने अन्दर के जस्बाद  को जगा लो
 तुम्हे भी प्यार हो जायेगा
 दिल जब कैद हो जायेगा किसी की चाहत में
 वही प्यार  तुम्हे फिर ठुकराएगा
कशम उस खुदा की ऐ दोस्तों
उन ज़ख्मो से तू भी एक शायर हो  जायेगा

विजय गिरी